जीवन परिचय – संतराम बी.ए. (Santram B.A.)

प्रजापति कुम्हार समाज में समय-समय में ऐसी महान विभूतियों ने जन्म लिया जिन्होंने न केवल समाज बल्कि देश का भी नाम रोशन किया। उन्हीं में से एक है संतराम बी.ए.। जिन्होंने देश की विषमता भरी जातीय व्यवस्था, रूढि़वादिया, पाखण्डवाद, अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई। जाति और वर्गविहीन समाज के निर्माण के लिए अपनी कलम चलाई। संतराम बी.ए. ने 100 से अधिक पुस्तकें लिखी है तथा कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहें।

संतराम बी.ए. का जन्म पंचाज के होशियारपुर के बस्ती गाँव में 14 फरवरी 1987 में कुम्हार समाज में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बजवाड़ा के हाई स्कूल में हुई। इसके बाद 1909 में इन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से बी.ए. किया। इनके समय में बी.ए. पास करना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। इसलिए लोगों ने इन्हें संतराम बी.ए. कहना प्रारंभ कर दिया। तभी से इनका नाम संतराम बी.ए. हो गया।

संतराम बी.ए. ने अपने नाम के साथ कभी जाति का उल्लेख नहीं किया। क्योंकि वे देश में व्याप्त जाति और वर्ग व्यवस्था के खिलाफ थे। संतराम बी.ए. की विद्यार्थी जीवन से ही समाज सेवा के कार्यो में रूची थी। आगे जाकर वे स्वामी दयानन्द सरस्वती और श्रद्धानन्द के विचारों से काफी प्रभावित हुए। और आर्य समाजी होग गए। इसके बाद वे परमानन्द के संपर्क में आए। फिर दोनो ने मिलकर 1922 में ”जाति-पाति तोड़क मंडल ” की स्थापना की। जिसके प्रधान परमानन्द को बनाया गया तथा संतराम उसके सचिव बने।

धीरे-धीरे ”जाति-पाति तोड़क मंडल ” का दायरा बढऩे लगा और पंजाब की सीमाओं को पार करते हुए देशभर इसकी शाखाऐं खुलने लगी। मंडल के प्रयासों सैंकड़ो अंतर्जातीय हुए। जिसके चलते इन्हें कई प्रकार के विरोध का भी सामना करना पड़ा। संतराम ने अपनी संतानों का विवाह जाति-पाति के भेद से ऊपर उठकर किया।

मंडल के तत्वाधान में 1936 में वार्षिक अधिवेशन का आयोजन रखा गया। अध्यक्षीय भाषण के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर को लाहौर बुलाया गया था। जिसमें सहमति नहीं बनने के कारण अधिवेशन निरस्त कर दिया गया।

संतराम बी.ए. के द्वारा 1948 में लिखी गई किताब ”हमारा समाज ” काफी चर्चित रही। इससे उन्होंने हिन्दू समाज में हलचल मचा दी थी। इसमें कई ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से हिन्दू समाज में व्याप्त रूढि़वादिता पर कटाक्ष किया है।

संतराम के द्वारा लिखे जाने वाले लेख उस समय की सभी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे। संतराम बीए ने उर्दू में स्वयं की एक पत्रिका निकाली थी जिसका नाम क्रांति था। इसके अलावा उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया जिसमें जालंधर महाविद्यालय की मुख्य पत्रिका भारतीय तथा विश्वेश्वंरानन्द वैदिक संस्थान की पत्रिका विश्व ज्योति शामिल है। संतराम बी.ए. ने 31 मई 1988 को अपनी बेटी गार्गी चड्‌डा के यहाँ अंतिम सांस ली।