कहानी श्री करणपुर के शंकरिया कनपटी मार की

0
237

यह कहानी है शंकरिया हथोड़ामार की जो पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है 70 जनों को मौत के घाट उतार देने वाले सीरियल किल्लर के रूप में। शंकर कुम्हार की कहानी शुरू होती है भारत पाक सीमा के अंतिम छोर पर बसे श्री करणपुर जिला श्री गंगानगर राजस्थान से।

शंकर कुम्हार का परिवार मूलतः पंजाब के अमरपुरा गाँव का है, जिसे श्री करणपुर के चौधरी मोती राम पेंसिया लंबरदार (दौलत राम पेंसिया प्रदेश अध्यक्ष जनता दल यूनाइटेड के दादा जी) ने श्री करण पुर की कच्ची थेड़ी में लाकर बसाया था। शंकर कुम्हार चौधरी मोती राम लंबरदार की बहिन का पोता था। जिसका जन्म 1952 में हुआ था।

पुलिस रिकार्ड में दर्ज शंकर कुम्हार को पुलिस शंकरिया कनपटी मार हत्यारा बताती है जबकि उसके नजदीकी रिश्तेदार बताते हैं कि शंकर कुम्हार बाल्यकाल से विद्रोही स्वभाव का था। जुल्म करने वाले से ज्यादा जुल्म सहने को पाप मानता था।

जैसा कि भारत में सदियों से चला आ रहा हैं कि बहुजन समाज में पैदा होने वाले स्वाभिमानी और बहादुर शेरदिल इंसान को व्यवस्था पर हावी लोग बर्दाश्त नही कर पाते जिसके अनेकों उदाहरण समाज में मौजूद हैं चाहें फिर वो फूलन देवी की आपबीती हो या राजस्थान के रॉबिन हुड नागौर जिले के #आनंदपालसिंहरावणाराजपूत की कहानी हो।

शंकर कुम्हार ने भी जब होश संभाला तो अपने चारों ओर दलितों पिछड़ो पर कदम कदम पर होने वाले शोषण अत्याचार और असमानता का व्यवहार देख कर वो बागी हो उठा और 1972-73 में चार हत्याएं कर जुर्म की दुनियां में कूद गया। इसी दौरान वो हर उस शख्स को मौत के घाट उतारता चला गया जो उसकी नजरों में शोषणकर्ता था और पाखंडी था।

अन्ततः शंकर कुम्हार को पुलिस ने अपने शिकंजे में ले लिया और मई 1979 में जयपुर में शंकर कुम्हार को शंकरिया कनपटी मार के रूप में घोषित करके फाँसी के फंदे पर झूला दिया।

संकलन – श्याम_वर्मा
प्रेषक : शिवभगवान सारड़ीवाल (आजीवक)
सीकर, राजस्थान मो.- 9414664070