देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी

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देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी

देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी
पुरी दुनिया इं के सामने हारी…..
देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी….

व्यापारी का व्यापार खाग्यी, कर्मचारी की तन्ख्वाह।
मजदूरा की मजदूरी खाग्यी, किसाना की फसला सारी।।
देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी…. (1)

स्कूल खुले न कोचिंग खुले, खुले ना बाजार सारी।
पगडण्डी से ले के गली मोहल्ला, सुनी होग्यी सड़का सारी।।
देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी…. (2)

गाँवां में किसान दु:खी छै, दु:खी छै सगला नर-नारी।
खेलबा को मोहत्ताज होग्या, टाबर और खिलाड़ी।
देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी…. (3)

घणां की शादियां रूक गी, जीमण रूक गी सारी
गोठ-गुगरी को तरसग्या, अब सारा नर-नारी।।
देख भाया या आग्यी कोरोना की महामारी…. (4)

– प्रहलाद कुमार प्रजापति, संपादक प्रजापति मंथन, झालावाड़ मो.- 9875039534

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